उदास राते
ये उदास रातें,चुभती सुबह
कचोटता सा दिन,
सब कुछ फीका फीका है एक तेरे बगैर
ये बाज़ारों की भीड़,ये दोस्तों की मंडलियाँ,
सब कुछ तन्हा तन्हा है एक तेरे बगैर
ये ढोल तमाशे,ये शादी की शहनाईयां,
सब कुछ झूठा झूठा है एक तेरे बगैर
ये बुलबुल जो कभी बातें करती थी मुझसे,
सब कुछ रुसवा रुसवा है एक तेरे बगैर
वो कबूतर जो दाना चुगने रोज आते थे ll
अब नही आते तुम्हारे जाने के बाद
वो गिलहरी जिसे तुम रोज कुछ खिलाती थीं ll
लगता है उसने भी ठिकाना बदल लिया
तुम्हारी तरह,लेकिन तुम्हारे गम मे तुमने घर बदला किसी और के लिए
लेकिन उसने घर बदला तुम्हारी याद मे,
ये भंवरे, ये तितली ये फूल पत्ते सब खफा हैं तुमसे
लौट आओ मेरी खातिर ना सही,
इन बेचारों की खातिर लौट आओ
ये बड़ी शिद्दत से राह तकते रहते हैं तुम्हारी
तुम्हारे जाने के बाद सब कुछ थम सा गया है ll
और मेरे भीतर भी कोई नासूर जम सा गया है ll
हर्ष जैन सहर्ष